Monday, January 20, 2020

उबुद: एक खूबसूरत दुनिया

   उबुद का प्राकृतिक सौन्दर्य किसी स्वर्ग से कम नहीं। जी हां, उबुद पर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया हो।

   इंडोनेशिया के बाली द्वीप का एक छोटा सा गांव उबुद वस्तुत: एक शानदार वैश्विक पर्यटन है। खास यह कि उबुद की सुन्दरता पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। शायद इसीलिए उबुद सबसे अधिक पसंदीदा हनीमून प्वांइट के तौर पर देखा जाता है। 

   खास यह है कि उबुद इंडोनेशिया की कला एवं संस्कृति का अद्भुत केन्द्र बन चुका है। लिहाजा इंडोनेशिया की कला एवं संस्कृति से साक्षात्कार करना हो तो पर्यटकों को उबुद की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। 

   बाली द्वीप का यह सुन्दर गांव वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। उबुद को बाली की सांस्कृतिक जड़ भी कहा जाता है। दुनिया भर के पर्यटक इंडोनेशिया की कला एवं संस्कृति से रूबरू होने के लिए उबुद की यात्रा करते हैं। शायद इसीलिए उबुद को 'आईलैंड आफ गॉड्स" कहा जाता है।

   उबुद के सम्पूर्ण परिदृश्य को देखें तो भगवान के द्वीप के नाम से भी उबुद को ख्याति हासिल हुई। खास यह कि उबुद में प्राकृतिक सौन्दर्य का हर आयाम आलोकित है। मसलन घाटियों-वादियोें से लेकर झीलों-झरनों एवं समुद्र की अठखेलियां सहित बहुत कुछ उबुद में दर्शनीय है। 

   उबुद अपने आगोश में सम्मोहन का सुन्दरतम परिदृश्य रखता है। शायद इसी कारण उबुद आने वाले पर्यटकों की संख्या नित्य एवं निरंतर बढ़़ती जा रही है। चौतरफा सीना ताने खड़े 11 विशाल पहाड़ उबुद की शान एवं शोभा हैं।

    बाली का सबसे विख्यात ज्वालामुखी बातुर उबुद में ही है। लिहाजा ज्वालामुखी का यह खास आकर्षण भी पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। बाली की चुनिंदा पर्वत श्रंखला उबुद को बेहद आकर्षक बना देती है। पर्यटक उबुद पर पर्वतारोहण का शौक भी पूरा कर सकते हैं।

  वाटर स्प्रिंग अर्थात गर्म पानी के रुाोत में स्नान करना एक विशेष ताजगी प्रदान करता है। खास यह कि पर्यटक उबुद पर एक अलग ही दुनिया का एहसास करते हैं। यहां खान पान से लेकर कलात्मकता की विविधिता पर्यटकों को रोमांचित कर देती है।

   पर्यटक उबुद पर आध्यात्मिकता का एक खास एहसास करते हैं। लिहाजा पर्यटक बाली के इस सुन्दर गांव उबुद केे रोमांचक अनुभव को कभी भूल नहीं पाते। चावल की खेती उबुद में खास होती है। लिहाजा चावल की खास सुगंध से पर्यटक एक विशेष प्रफुल्लता का एहसास करते हैं।

    पर्यटक उबुद पर हिन्दू संस्कृति एवं सभ्यता का एक जुड़ाव महसूस करतेे हैं। नारियल के पेड़ एवं पानी से भरे मैदान एक ग्रामीण परिदृश्य को जीवंत कर देते हैं। 

   इस इलाके में कॉफी, नारियल, अदरक, मिर्ची आदि इत्यादि की खास उपज होती है। इसे धर्म एवं आध्यात्म की खासियत से परिपूरित माना जाता है। खास तौर से उबुद में ब्राह्मा, विष्णु एवं शिव की भक्ति का प्रवाह सामान्य तौर पर देखा जा सकता है।

   धर्म की प्रगाढ़ता का सहज अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि एक वर्ग किलोमीटर के दायरे में दुनिया में सबसे अधिक मंदिर-देवालय इस इलाके में मिलेंगे। खान पान में भी उबुद का कहीं कोई जोड़ नहीं। यहां का भोजन-व्यंजन बेहद लजीज होता है।

    उबुद बाली की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट गुरह राय इंटरनेशनल एयरपोर्ट बाली है। निकटतम रेलवे स्टेशन बाली रेलवे स्टेशन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी उबुद की यात्रा कर सकते हैं।
-8.508230,115.263100

Thursday, January 16, 2020

माउंट किनाबालु : सुगंध का खजाना

   माउंट किनाबालु को धरती पर स्वर्ग कहा जाना चाहिए। जी हां, माउंट किनाबालु का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। लिहाजा यह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। 

   मलेशिया के वेस्ट कोस्ट डिवीजन का यह प्राकृतिक सौन्दर्य वैश्विक पर्यटकों का एक खास आकर्षण है। लिहाजा दुनिया के पर्यटक माउंट किनाबालु खास तौर से घूमने आते हैं। समुद्र तल से करीब 4095 मीटर ऊंचाई पर स्थित माउंट किनाबालु वस्तुत: प्रकृति का शानदार आयाम एवं सुगंध का खजाना है। 

   दुर्लभ एवं सामान्य आैषधीय वनस्पतियों की खान कहा जाने वाला माउंट किनाबालु अपनी आगोश में विविधिता रखता है। विशेषज्ञों की मानें तो माउंट किनाबालु दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। 

   एशिया का सबसे पसंदीदा पर्वतारोहण क्षेत्र माना जाने वाला माउंट किनाबालु जैव विविधिता के लिए दुनिया में जाना जाता है। खास यह कि फर्न की 600 से अधिक प्रजातियां माउंट किनाबालु में संरक्षित हैं। इतना ही नहीं, पक्षियों की 326 से अधिक प्रजातियां माउंट किनाबालु पर कोलाहल एवं कलरव करती सुनाई देती हैं। 

    माउंट किनाबालु पर सैरसपाटा के लिए आवश्यक है कि मान्यता प्राप्त एवं प्रशिक्षित गाइड की सहायता ली जाये। जिससे पर्यटक बिना किसी असुविधा के मौज मस्ती कर सकें। माउंट किनाबालु की विशिष्टताओें को देखते हुए यूनेस्को ने इसे विश्व विरासत घोषित किया है।

   विश्व विरासत के तौर पर संरक्षित माउंट किनाबालु पर पर्यटक पर्वतारोहण का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो ब्राोर्नियो की क्रोकर रेंज की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। खास यह है कि माउंट किनाबालु मलय द्वीप समूह का सबसे ऊंचा पर्वत है। इतना ही नहीं, मलेशिया का सबसे ऊंचा पर्वत माना जाता है।

   स्थलाकृति सुन्दरता में भी माउंट किनाबालु का कोई जोड़ नहीं है। शायद इसीलिए माउंट किनाबालु को दुनिया का सबसे सुन्दर पर्वत माना जाता है। अल्पाइन घास के सुन्दर एवं विशाल मैदान माउंट किनाबालु की शान एवं शोभा हैं। झाड़ियों के गुम्बद भी यहां बेहद आकर्षक प्रतीत होते हैं। 
   दुनिया के अति महत्वपूर्ण जैविक स्थलों में एक माउंट किनाबालु पर आैषधीय वनस्पतियों की 6000 से अधिक प्रजातियां संरक्षित, पुष्पित एवं पल्लवित हैं। यहां की प्राकृतिक समृद्धता का सहज अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि राफलेशिया पौधे माउंट किनाबालु की विशेषता हैं। 

    राफलेशिया का पौधा एक खास विशिष्टता रखता है। जिसमें दुनिया का सबसे बड़ा आैर इकलौता फूल होता है। इस फूल का आकार प्रकार 94 सेंटीमीटर तक बढ़ता है। हालांकि फूल का खिलना अति दुर्लभ होता है। अंजीर के पेड़ों के साथ ही कीटभक्षी पौधे भी यहां की विशिष्टता में शामिल हैं। 

   विशेषज्ञों की मानें तो आर्किड की 800 से अधिक प्रजातियां माउंट किनाबालु पर आसानी से देखी जा सकती हैं। विशेषज्ञों की मानें तो यह विशिष्टता केवल माउंट किनाबालु पर ही दिखेगी। दांतेदार एवं सर्पकार इलाका माउंट किनाबालु काफी कुछ विशिष्ट है। 

   दुनिया के विशिष्ट गोल्फ क्लब श्रंखला में माउंट किनाबालु का गोल्फ क्लब खास तौर से जाना एवं पहचाना जाता है। लिहाजा पर्यटक माउंट किनाबालु पर गोल्फ का शौक भी पूरा कर सकते हैं। मलमल सी हरी-भरी घास मन मस्तिष्क को प्रफुल्लित कर देती है।

    शीतल एवं शांत जलवायु वाला माउंट किनाबालु पर्यटकों को एक खास ऊर्जा प्रदान करता है। माउंट किनाबालु पर बादलों की घुमक्कड़ी बेहद रोमांचकारी होती है। 

   ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे बादलों संग सैर हो रही हो। कुल मिलाकर माउंट किनाबालु पर्यटकों को प्राकृतिक सौन्दर्य के दिव्य दर्शन कराता है। जिससे मन एवं मस्तिष्क प्रफुल्लित हो उठता है।

   माउंट किनाबालु की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कोटा किनाबालु इण्टरनेशनल एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोटा किनाबालु है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी माउंट किनाबालु की यात्रा कर सकते हैं।
5.980160,116.072960

Monday, January 13, 2020

कुर्सियांग हिल स्टेशन: सुगंध का खजाना

    कुर्सियांग हिल स्टेशन को सुगंध का खजाना कहा जाना चाहिए। कुर्सियांग हमेशा आैषधीय वनस्पतियों, विभिन्न प्रजातियों के फूलों एवं चाय-कॉफी के बागानों की सुगंध से महकता रहता है। 

   सफेद आर्किड के फूलों से सुसज्जित कुर्सियांग पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। भारत के पश्चिम बंगाल के जिला दार्जिलिंग का यह सुन्दर हिल स्टेशन वस्तुत: पहाड़ियों, घाटियों-वादियों का इलाका है। 

   समुद्र तल से करीब 1500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कुर्सियांग वस्तुत: प्रकृति की गोद है। जी हां, कुर्सियांग पर चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा आलोकित है। यह प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। 
  दार्जिलिंग से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित कुर्सियांग हिल स्टेशन भले आकार में छोटा हो लेकिन इसका प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत है। 

   कुर्सियांग को स्थानीयता में खरसांग कहा जाता है। खारसांग का शाब्दिक अर्थ सफेद आर्किड़ फूलों की भूमि। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से करीब 587 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुर्सियांग हिल स्टेशन अपने विशिष्ट सौन्दर्य के लिए वैश्विक ख्याति रखता है।

   लिहाजा एक विशेष अाकर्षण वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित करता है। कुर्सियांग हिल स्टेशन पर पर्यटकों के ठहरने के लिए आकर्षक एवं सुन्दर रिसार्ट एवं अतिथि गृहों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। लिहाजा कुर्सियांग हिल स्टेशन पर ठहर कर पर्यटक पर्यटन का भरपूूर आनन्द ले सकते हैं। 

   इतना ही नहीं, पर्यटक विलेज टूरिज्म का भी आनन्द ले सकते हैं। चौतरफा पहाड़ियों से घिरा कुर्सियांग हिल स्टेशन कभी उत्तरी-पूर्वी राज्य सिक्किम का हिस्सा हुआ करता था। आैषधीय वनस्पतियों की प्रचुरता कुर्सियांग हिल स्टेशन को काफी कुछ खास बना देती है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो दुर्लभ एवं विलुप्त आैषधीय वनस्पतियों की प्रचुरता ही कुर्सियांग हिल स्टेशन की खासियत है। शीर्ष पर होने के कारण कुर्सियांग हिल स्टेशन अक्सर बादलों की गिरफ्त में रहता है। लिहाजा पर्यटक कुर्सियांग हिल स्टेशन पर बादलों के रोमांच का एहसास कर सकते हैं। 

   बादलों का स्पर्श पर्यटकों को प्रफुल्लित करने के साथ ही पुलकित कर देता है। पर्यटक कुर्सियांग हिल स्टेशन पर विभिन्न प्रकार की सुगंध का एहसास करते हैं। जिससे मन मस्तिष्क में एक विशेष ताजगी का संचार होता है। 

   लिहाजा पर्यटक कहीं अधिक ऊर्जावान होने का एहसास करते हैं। कुर्सियांग हिल स्टेशन एवं आसपास आकर्षक एवं सुन्दर स्थानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इनमें खास तौर से ईगल क्रेग, डॉव हिल, अम्बोतिया शिव मंदिर एवं चाय-कॉफी बागान आदि इत्यादि हैं। 

   खास यह कि कुर्सियांग हिल स्टेशन की यात्रा का सबसे बेहतरीन समय अप्रैल-मई का होता है। हालांकि पर्यटक कुर्सियांग हिल स्टेशन की यात्रा कभी भी कर आनन्द की सुखद अनुभूति कर सकते हैं। 
   ईगल क्रेग: ईगल क्रेग वस्तुत: कुर्सियांग हिल स्टेशन का एक मुख्य आकर्षण है। ईगल क्रेग से पर्यटक आसपास का प्राकृतिक सौन्दर्य निहार सकते हैं।
   ईगल क्रेग से आसपास की पर्वतीय चोटियों का सौन्दर्य देखा जा सकता है। इतना ही नहीं, सिलीगुड़ी के खूबसूरत मैदान भी यहां से देखे जा सकते हैं। शांत एवं शीतल परिवेश वाला ईगल क्रेग बेहद दर्शनीय है।

   डॉव हिल: डॉव हिल वस्तुत: कुर्सियांग हिल स्टेशन एवं आसपास का फैला हुआ विशाल क्षेत्र है। इस इलाके की एक पहाड़ी को डॉव हिल कहा जाता है। डॉव हिल का इलाका वस्तुत: एक सघन वन क्षेत्र है। इसे लघु वन्य जीव अभयारण्य कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।
   कारण यह सघन वन क्षेत्र वन्य जीवों की आश्रय स्थली है। डॉव हिल पर एक विशाल जलाशय भी है। जलाशय खूबसूरत वनस्पतियों से घिरा हुआ है। देवदार एवं शंकुधारी पेड़ यहां के सौन्दर्य में चार चांंद लगा देते हैं। 
   अम्बोतिया शिव मंदिर: अम्बोतिया शिव मंदिर कुर्सियांग हिल स्टेशन का मुख्य धार्मिक स्थान है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर अति प्राचीन है। 
   अम्बोतिया शिव मंदिर कुर्सियांग हिल स्टेशन का अति प्रसिद्ध धर्म स्थान है। मान्यता है कि भगवान शिव के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं का कल्याण होता है। भक्त मंदिर में दिव्य भव्य शिवलिंग के दर्शन करते हैं।
    चाय-कॉफी बागान: चाय-कॉफी बागान वस्तुत: कुर्सियांग हिल स्टेशन की शान एवं शोभा हैं। खास यह कि कुर्सियांग हिल स्टेशन की पहाड़ियां चाय एवं कॉफी केे बागान से सुसज्जित दिखती हैं। बागान की सुगंध से पर्यटकों का दिल एवं दिमाग प्रफुल्लित हो उठता है। बागान की खूबसूरती देखते ही बनती है।
   कुर्सियांग हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बागडोगरा एयरपोर्ट है। बागडोगरा एयरपोर्ट से कुर्सियांग हिल स्टेशन की दूरी करीब 95 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन जलपाईगुड़ी रेलवे जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कुर्सियांग हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
26.877900,88.277500

Friday, January 10, 2020

मोंगपोंग हिल स्टेशन: बादलों का आशियाना

   मोंगपोंग हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य निश्चय ही मुग्ध कर लेगा। जी हां, मोंगपोंग का प्राकृतिक सौन्दर्य अतुलनीय है। 

   लिहाजा पर्यटक मोंगपोंग हिल स्टेशन के सौन्दर्य पर फिदा हो जाते हैं। इसे खूबसूरती एवं एडवेंचर्स का शानदार गंतव्य कहा जाना चाहिए। भारत के पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग के अति दर्शनीय हिल स्टेशन मोंगपोंग को रोमांच का पर्याय कहा जाना चाहिए। 

   घाटियों-वादियों एवं आैषधीय वनस्पतियों के सघन वन क्षेत्र सेे आच्छादित मोंगपोंग हिल स्टेशन हिमालय की आगोश का एक सुन्दर नगीना है। सिलीगुड़ी से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित मोंगपोंग हिल स्टेशन दुर्लभ एवं विलुप्त आैषधीय वनस्पतियों का खजाना है।

  मोंगपोंग का विशाल आैषधीय वनस्पतियों का भण्डारण विशेष हैं। यह आैषधीय वनस्पतियां मोंगपोंग को काफी कुछ खास बना देती हैं। तीस्ता नदी के किनारे रचा बसा मोंगपोंग वस्तुत: पश्चिम बंगाल का एक दर्शनीय पहाड़ी गांव है।

   चौतरफा निराली छटा ने मोंगपोंग को एक शानदार हिल स्टेशन बना दिया। मोंगपोंग हिल स्टेशन के मखमली मैदान एवं ढ़लान काफी कुछ खास हैं। 
   पर्यटक यहां रोमांच का एहसास करते हैं तो वहीं ट्रैकिंग के शौकीन पर्यटकों के लिए मोंगपोंग हिल स्टेशन किसी स्वर्ग से कम नहीं है। पर्यटक यहां रोमांचक ट्रैकिंग का आनन्द कभी भूल नहीं पाते। 

   मोंगपोंग पर बादलों का खिलंदड़पन बेहद रोमांचक होता है। ऐसा प्रतीत होता है कि मोंगपोंग हिल स्टेशन बादलों का खास आशियाना है। कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि बादल पर्यटकों के साथ साथ चहलकदमी कर रहे हों। परिवेश में बादलों की घुमक्कड़ी देख कर पर्यटक रोमांच से भर उठते हैं। 

   घाटियों-वादियों वाले इस इलाके में बादलों एवं धुंध का आच्छादन परिवेश को शीतल एवं शांत बनाये रखता है। लिहाजा इस परिवेश में पर्यटक बेहद शांति का एहसास करते हैं। मोंगपोंग हिल स्टेशन एवं उसके आसपास आकर्षण की एक शानदार श्रंखला विद्यमान है। 

   मोंगपोंग का मुख्य आकर्षण देखें तो तीस्ता नदी की घाटी एवं महानंदा वन्य जीव अभयारण्य है।  तीस्ता नदी के तट पर एक छोटा बाजार भी है। इस बाजार में हस्तशिल्प उत्पादों की प्रमुखता रहती है। लिहाजा पर्यटक यहां खरीदारी के शौक को पूरा कर सकते हैं। 

   घाटियों-वादियों वाले इस इलाके में अतिथि गृह भी हैं। पर्यटक इन अतिथि गृहों में आश्रय लेकर पर्यटन के आनन्द को दोगुना कर सकते हैं। इतना ही नहीं, पर्यटक मोंगपोंग गांव में भी अतिथि होने का लाभ ले सकते हैं। 
   आशय यह कि पर्यटक गांव में विलेज टूरिज्म का भरपूर आनन्द ले सकतेे हैं। वस्तुत: झीलों-झरनों एवं पहाड़ों वाले इस इलाके में पर्यटक पल पल रोमांच का एहसास करते हैं।

   महानंदा वन्य जीव अभयारण्य: महानंदा वन्य जीव अभयारण्य मोंगपोंग हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण है। अभयारण्य का मुख्य आकर्षण पक्षी विहार है। इस पक्षी विहार में भारतीय एवं प्रवासी पक्षियों की सदाबहार एवं दुर्लभ पक्षियों की असंख्य प्रजातियां कोलाहल एवं कलरव करती दिखेंगी। 

   सर्दियों में तो पक्षियों की रौनक देखते ही बनती है। कारण सेंट्रल एशिया से लेकर लद्दाख तक के प्रवासी पक्षी यहां आकर प्रवास करते हैं। पक्षी विहार में खास तौर से चकवा, पिंटेल, बतख, खोयाहांस, पोचर्ड, जंगली बतख आदि इत्यादि बहुत कुछ पक्षी दिखेंगे। अभयारण्य वन्य जीवों से गुलजार रहता है।
   लिहाजा अभयारण्य का भ्रमण कर वन्य जीवों के रोमांच का एहसास कर सकते हैं। अभयारण्य में अतिथि गृह भी हैं। इनमें प्रवास कर पर्यटक सैर सपाटा का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।

   ओडलाबाड़ी: ओडलाबाड़ी मोंगपोंग हिल स्टेशन का एक मुख्य आकर्षण है। वस्तुत: ओडलाबाड़ी चाय-कॉफी बागान का इलाका है। 
   मोंगपोंग से करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित यह एक अति दर्शनीय इलाका है। छेल एवं घिस नदियों के मध्य रचा बसा ओडलाबाड़ी चाय-काफी के स्वाद एवं सुगंध के लिए जाना एवं पहचाना जाता है।

    मोंगपोंग हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बागडोगरा एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन सिलीगुड़ी रेलवे जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मोंगपोंग हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
27.066940,88.470550

Monday, January 6, 2020

समसिंग हिल स्टेशन: प्रकृति का उपहार

    समसिंग हिल स्टेशन को प्रकृति का सुन्दर उपहार कहा जाना चाहिए। जी हां, समसिंग का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। 

   शायद इसीलिए समसिंग हिल स्टेशन पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। चौतरफा खूबसूरत पहाड़, झीलों-झरनों का सौन्दर्य एवं मखमली घास के मैदान एवं ढ़लान समसिंग की शान एवं शोभा हैं। भारत के पश्चिम बंगाल के जिला जलपाईगुड़ी का समसिंग वस्तुत: एक छोटा सा पर्वतीय गांव है। 

   समुद्र तल से करीब 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित समसिंग अति दर्शनीय है। चौतरफा चाय-कॉफी के बागानों की श्रंखला बेहद सुन्दर लगती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया हो। आैषधीय वनस्पतियों के सघन वन क्षेत्र समसिंग की खासियत हैं।

   लिहाजा चाय-कॉफी एवं आैषधीय वनस्पतियों की सुगंध से परिवेश महकता रहता है। खास यह कि चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की एक सुन्दर आभा समसिंग को बेहद दर्शनीय बना देती है। पर्यटक यहां से भूटान का पर्वतीय सौन्दर्य भी निहार सकते हैं। 

   शीतल एवं शांत हवाओं के झोके पर्यटकों के मन एवं तन को प्रफुल्लित कर देते हैं। कोहरा एवं धुंध वाली जलवायु पर्यटकों को खासतौर से रोमांचित कर देती है। लिहाजा इसे एक शानदार एवं आदर्श पिकनिक स्पॉट या सुन्दर पर्यटन कहा जा सकता है। वस्तुत: देखें तो समसिंग एक अति सुन्दर चाय-कॉफी बागान है।

   चाय-कॉफी की भीनी-भीनी सुगंध दिल एवं दिमाग को एक विशेष ताजगी प्रदान करती है। राजसी हिमालय की तलहटी में रचा बसा समसिंग खास तौर से गांव-गिरांव की एक सोंधी सुगंध भी रखता है। 

    करीब 4000 की आबादी वाला समसिंग आतिथ्य के लिए भी जाना एवं पहचाना जाता है। लिहाजा पर्यटक समसिंग में विलेज टूरिज्म का भी आनन्द ले सकते हैं। बादलों की चहलकदमी पर्यटकों में एक जोेश के साथ ही रोमांच का भी संचार करती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे बादल संग-संग चल रहे हों।

   कभी बादल पर्यटकों की गोद में होते हैं तो कभी पर्यटक बादलों की गिरफ्त में होते हैं। खास तौर से यह पल बेहद रोमांचक होते हैं। सर्दियों एवं बारिश के मौसम में समसिंग हिल स्टेशन के सैर सपाटा का आनन्द ही कुछ आैर होता है। 

   सर्दियों में बर्फीले पहाड़ों का सौन्दर्य परिवेश में चार चांद लगा देता है। चाय-काफी के बागानों के इलाके में लंबी ड्राइव बेहद प्रफुल्लित कर देती है। समसिंग में एक छोटा बांध भी है। यह बांध पर्यटकों को अपने सौन्दर्य से आकर्षित करता है।

    पर्यटक समसिंग हिल स्टेशन पर हिमालय की तलहटी का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। ट्रैकर्स के लिए समसिंग किसी स्वर्ग से कम नहीं है। फर्न प्वाइंट समसिंग का एक मुख्य आकर्षण है। साहसी उत्साही ट्रैकर्स के लिए यह इलाका बेहद पसंदीदा है। 

    नेओरा घाटी नेशनल पार्क समसिंग का मुख्य आकर्षण है। वस्तुत: यह एक पक्षी विहार है। विदेशी एवं रंगीन पक्षियों की आश्रय स्थली के तौर पर स्थापित यह पार्क पक्षियों के लिए किसी स्वर्ग की भांति है। पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां इस पार्क में संरक्षित हैं।

   समसिंग हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बागडोगरा एयरपोर्ट जलपाईगुड़ी है। 

    जलपाईगुड़ी एयरपोर्ट से समसिंग हिल स्टेशन की दूरी करीब 82 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन जलपाईगुड़ी रेलवे जंक्शन है। रेलवे स्टेशन से समसिंग हिल स्टेशन की दूरी करीब 83 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी समसिंग हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
26.521080,88.727440

ओडो बोटानिया: रोमांचक मखमली एहसास    ओडो बोटानिया को धरती का ताज कहा जाना चाहिए। जी हां, ओडो बोटानिया का प्राकृतिक सौन्दर्य विलक्षण है...