Friday, January 10, 2020

मोंगपोंग हिल स्टेशन: बादलों का आशियाना

   मोंगपोंग हिल स्टेशन का प्राकृतिक सौन्दर्य निश्चय ही मुग्ध कर लेगा। जी हां, मोंगपोंग का प्राकृतिक सौन्दर्य अतुलनीय है। 

   लिहाजा पर्यटक मोंगपोंग हिल स्टेशन के सौन्दर्य पर फिदा हो जाते हैं। इसे खूबसूरती एवं एडवेंचर्स का शानदार गंतव्य कहा जाना चाहिए। भारत के पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग के अति दर्शनीय हिल स्टेशन मोंगपोंग को रोमांच का पर्याय कहा जाना चाहिए। 

   घाटियों-वादियों एवं आैषधीय वनस्पतियों के सघन वन क्षेत्र सेे आच्छादित मोंगपोंग हिल स्टेशन हिमालय की आगोश का एक सुन्दर नगीना है। सिलीगुड़ी से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित मोंगपोंग हिल स्टेशन दुर्लभ एवं विलुप्त आैषधीय वनस्पतियों का खजाना है।

  मोंगपोंग का विशाल आैषधीय वनस्पतियों का भण्डारण विशेष हैं। यह आैषधीय वनस्पतियां मोंगपोंग को काफी कुछ खास बना देती हैं। तीस्ता नदी के किनारे रचा बसा मोंगपोंग वस्तुत: पश्चिम बंगाल का एक दर्शनीय पहाड़ी गांव है।

   चौतरफा निराली छटा ने मोंगपोंग को एक शानदार हिल स्टेशन बना दिया। मोंगपोंग हिल स्टेशन के मखमली मैदान एवं ढ़लान काफी कुछ खास हैं। 
   पर्यटक यहां रोमांच का एहसास करते हैं तो वहीं ट्रैकिंग के शौकीन पर्यटकों के लिए मोंगपोंग हिल स्टेशन किसी स्वर्ग से कम नहीं है। पर्यटक यहां रोमांचक ट्रैकिंग का आनन्द कभी भूल नहीं पाते। 

   मोंगपोंग पर बादलों का खिलंदड़पन बेहद रोमांचक होता है। ऐसा प्रतीत होता है कि मोंगपोंग हिल स्टेशन बादलों का खास आशियाना है। कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि बादल पर्यटकों के साथ साथ चहलकदमी कर रहे हों। परिवेश में बादलों की घुमक्कड़ी देख कर पर्यटक रोमांच से भर उठते हैं। 

   घाटियों-वादियों वाले इस इलाके में बादलों एवं धुंध का आच्छादन परिवेश को शीतल एवं शांत बनाये रखता है। लिहाजा इस परिवेश में पर्यटक बेहद शांति का एहसास करते हैं। मोंगपोंग हिल स्टेशन एवं उसके आसपास आकर्षण की एक शानदार श्रंखला विद्यमान है। 

   मोंगपोंग का मुख्य आकर्षण देखें तो तीस्ता नदी की घाटी एवं महानंदा वन्य जीव अभयारण्य है।  तीस्ता नदी के तट पर एक छोटा बाजार भी है। इस बाजार में हस्तशिल्प उत्पादों की प्रमुखता रहती है। लिहाजा पर्यटक यहां खरीदारी के शौक को पूरा कर सकते हैं। 

   घाटियों-वादियों वाले इस इलाके में अतिथि गृह भी हैं। पर्यटक इन अतिथि गृहों में आश्रय लेकर पर्यटन के आनन्द को दोगुना कर सकते हैं। इतना ही नहीं, पर्यटक मोंगपोंग गांव में भी अतिथि होने का लाभ ले सकते हैं। 
   आशय यह कि पर्यटक गांव में विलेज टूरिज्म का भरपूर आनन्द ले सकतेे हैं। वस्तुत: झीलों-झरनों एवं पहाड़ों वाले इस इलाके में पर्यटक पल पल रोमांच का एहसास करते हैं।

   महानंदा वन्य जीव अभयारण्य: महानंदा वन्य जीव अभयारण्य मोंगपोंग हिल स्टेशन का मुख्य आकर्षण है। अभयारण्य का मुख्य आकर्षण पक्षी विहार है। इस पक्षी विहार में भारतीय एवं प्रवासी पक्षियों की सदाबहार एवं दुर्लभ पक्षियों की असंख्य प्रजातियां कोलाहल एवं कलरव करती दिखेंगी। 

   सर्दियों में तो पक्षियों की रौनक देखते ही बनती है। कारण सेंट्रल एशिया से लेकर लद्दाख तक के प्रवासी पक्षी यहां आकर प्रवास करते हैं। पक्षी विहार में खास तौर से चकवा, पिंटेल, बतख, खोयाहांस, पोचर्ड, जंगली बतख आदि इत्यादि बहुत कुछ पक्षी दिखेंगे। अभयारण्य वन्य जीवों से गुलजार रहता है।
   लिहाजा अभयारण्य का भ्रमण कर वन्य जीवों के रोमांच का एहसास कर सकते हैं। अभयारण्य में अतिथि गृह भी हैं। इनमें प्रवास कर पर्यटक सैर सपाटा का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।

   ओडलाबाड़ी: ओडलाबाड़ी मोंगपोंग हिल स्टेशन का एक मुख्य आकर्षण है। वस्तुत: ओडलाबाड़ी चाय-कॉफी बागान का इलाका है। 
   मोंगपोंग से करीब 17 किलोमीटर दूर स्थित यह एक अति दर्शनीय इलाका है। छेल एवं घिस नदियों के मध्य रचा बसा ओडलाबाड़ी चाय-काफी के स्वाद एवं सुगंध के लिए जाना एवं पहचाना जाता है।

    मोंगपोंग हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बागडोगरा एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन सिलीगुड़ी रेलवे जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मोंगपोंग हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
27.066940,88.470550

Monday, January 6, 2020

समसिंग हिल स्टेशन: प्रकृति का उपहार

    समसिंग हिल स्टेशन को प्रकृति का सुन्दर उपहार कहा जाना चाहिए। जी हां, समसिंग का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। 

   शायद इसीलिए समसिंग हिल स्टेशन पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। चौतरफा खूबसूरत पहाड़, झीलों-झरनों का सौन्दर्य एवं मखमली घास के मैदान एवं ढ़लान समसिंग की शान एवं शोभा हैं। भारत के पश्चिम बंगाल के जिला जलपाईगुड़ी का समसिंग वस्तुत: एक छोटा सा पर्वतीय गांव है। 

   समुद्र तल से करीब 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित समसिंग अति दर्शनीय है। चौतरफा चाय-कॉफी के बागानों की श्रंखला बेहद सुन्दर लगती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया हो। आैषधीय वनस्पतियों के सघन वन क्षेत्र समसिंग की खासियत हैं।

   लिहाजा चाय-कॉफी एवं आैषधीय वनस्पतियों की सुगंध से परिवेश महकता रहता है। खास यह कि चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की एक सुन्दर आभा समसिंग को बेहद दर्शनीय बना देती है। पर्यटक यहां से भूटान का पर्वतीय सौन्दर्य भी निहार सकते हैं। 

   शीतल एवं शांत हवाओं के झोके पर्यटकों के मन एवं तन को प्रफुल्लित कर देते हैं। कोहरा एवं धुंध वाली जलवायु पर्यटकों को खासतौर से रोमांचित कर देती है। लिहाजा इसे एक शानदार एवं आदर्श पिकनिक स्पॉट या सुन्दर पर्यटन कहा जा सकता है। वस्तुत: देखें तो समसिंग एक अति सुन्दर चाय-कॉफी बागान है।

   चाय-कॉफी की भीनी-भीनी सुगंध दिल एवं दिमाग को एक विशेष ताजगी प्रदान करती है। राजसी हिमालय की तलहटी में रचा बसा समसिंग खास तौर से गांव-गिरांव की एक सोंधी सुगंध भी रखता है। 

    करीब 4000 की आबादी वाला समसिंग आतिथ्य के लिए भी जाना एवं पहचाना जाता है। लिहाजा पर्यटक समसिंग में विलेज टूरिज्म का भी आनन्द ले सकते हैं। बादलों की चहलकदमी पर्यटकों में एक जोेश के साथ ही रोमांच का भी संचार करती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे बादल संग-संग चल रहे हों।

   कभी बादल पर्यटकों की गोद में होते हैं तो कभी पर्यटक बादलों की गिरफ्त में होते हैं। खास तौर से यह पल बेहद रोमांचक होते हैं। सर्दियों एवं बारिश के मौसम में समसिंग हिल स्टेशन के सैर सपाटा का आनन्द ही कुछ आैर होता है। 

   सर्दियों में बर्फीले पहाड़ों का सौन्दर्य परिवेश में चार चांद लगा देता है। चाय-काफी के बागानों के इलाके में लंबी ड्राइव बेहद प्रफुल्लित कर देती है। समसिंग में एक छोटा बांध भी है। यह बांध पर्यटकों को अपने सौन्दर्य से आकर्षित करता है।

    पर्यटक समसिंग हिल स्टेशन पर हिमालय की तलहटी का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। ट्रैकर्स के लिए समसिंग किसी स्वर्ग से कम नहीं है। फर्न प्वाइंट समसिंग का एक मुख्य आकर्षण है। साहसी उत्साही ट्रैकर्स के लिए यह इलाका बेहद पसंदीदा है। 

    नेओरा घाटी नेशनल पार्क समसिंग का मुख्य आकर्षण है। वस्तुत: यह एक पक्षी विहार है। विदेशी एवं रंगीन पक्षियों की आश्रय स्थली के तौर पर स्थापित यह पार्क पक्षियों के लिए किसी स्वर्ग की भांति है। पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां इस पार्क में संरक्षित हैं।

   समसिंग हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बागडोगरा एयरपोर्ट जलपाईगुड़ी है। 

    जलपाईगुड़ी एयरपोर्ट से समसिंग हिल स्टेशन की दूरी करीब 82 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन जलपाईगुड़ी रेलवे जंक्शन है। रेलवे स्टेशन से समसिंग हिल स्टेशन की दूरी करीब 83 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी समसिंग हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
26.521080,88.727440

Wednesday, January 1, 2020

जयंतिया हिल्स: धरती का स्वर्ग

   जयंतिया हिल्स को धरती का स्वर्ग कहा जाना चाहिए। चौतरफा उमड़ते-घुमड़ते बादलों का समूह... मखमली घास के विशाल मैदान एवं शानदार ढ़लान जयंतिया हिल्स को धरती पर स्वर्ग का एहसास करा देते हैं। 

   भारत के मेघालय के जिला जोवाई एवं खलीहरियत का मिला जुला इलाका जयंतिया हिल्स पर्यटन की दृष्टि से काफी कुछ खास है। जयंतिया हिल्स पर रोमांचक एहसास होता है। 

  आैषधीय वनस्पतियों का आच्छादन जयंतिया हिल्स की शान एवं शोभा है। जयंतिया हिल्स की पहाड़ियां एवं घाटियां सौन्दर्य का अद्भुत एवं विलक्षण प्रतिमान हैं। जयंतिया हिल्स का नैसर्गिक सौन्दर्य पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। 

   घुमावदार नदियां, झीलों-झरनों की शानदार श्रंखला जयंतिया हिल्स की खासियत है। खास यह है कि जयंतिया हिल्स का प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ ही पौराणिक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व भी है।

   जयंतिया के राजाओंं की राजधानी जयंतियापुर थी लेकिन राजवंश का पसंदीदा क्षेत्र जयंतिया हिल्स रहा। जयंतिया राजवंश की ग्रीष्मकालीन राजधानी हिल्स का एक गांव नारतियांग रहा। लिहाजा इस गांव में पौराणिकता दर्शनीय है।

   जयंतिया हिल्स का सांस्कृतिक महत्व भी काफी कुछ खास है। नारतियांग जयंतिया हिल्स का मुख्य आकर्षण है। पत्थरों का विशाल स्तंभ बेहद आकर्षक है। धर्म एवं आध्यात्म की दृष्टि से देखें तो नारतियांग का दुर्गा मंदिर श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का मुख्य केन्द्र है। 

   बारिश के मौसम का आनन्द लेना हो तो जयंतिया हिल्स की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। हालांकि मौसम कोई भी हो... जयंतिया हिल्स पर्यटकों को हमेशा अानन्द की सुखद अनुभूति कराता है। इस रोमांचक एहसास को पर्यटक कभी भूल नहीं पाते हैं। 

   बादलों की घुमक्कड़ी पर्यटकों को पल-पल प्रफुल्लित करती है। समुद्र तल से करीब 6000 फुट की ऊंचाई वाला यह हिल स्टेशन विशिष्टताओं की एक लम्बी श्रंखला रखता है।
   हालांकि अधिकांश हिस्से की ऊंचाई 3000 से 4000 फुट है। आैषधीय वनस्पतियों की प्रचुरता एवं लम्बी श्रंखला जयंतिया हिल्स की विशिष्टता है। 

   विलुप्त आैषधीय वनस्पतियां भी इस हिल्स पर पायी जाती हैं। इन आैषधीय वनस्पतियों की सुगंध से परिवेेश महकता रहता है। खास यह है कि जयंतिया हिल्स पर चीड़ की खास प्रजाति के दुर्लभ पेड़ बेहद दर्शनीय हैं। चीड़ की दुर्लभ प्रजाति का यह पेड़ हिमालय या इस क्षेत्र में ही पाया जाता है। 

   शाहबलूत, पांगर, मैग्नोलिया आदि दुर्लभ वृक्ष प्रजातियां जयंतिया हिल्स पर पुष्पित एवं पल्लवित हैं। वनस्पति विशेषज्ञों की मानें तो सर्वाधिक वनस्पतियां जयंतिया हिल्स पर पायी जाती हैं। 

   जयंतिया हिल्स के उत्तर में ब्राह्मपुत्र नदी का प्रवाह है तो वहीं पूर्व में बरैल पर्वत श्रंखला शान एवं शोभा को बढ़ाती है। जयंतिया हिल्स की गहरी घाटियां अत्यंत मनोरम हैं। चेरापूंजी एवं शिलांग जयंतिया हिल्स के अति दर्शनीय एवं सुन्दर शहर हैं।

   पर्यटक इन शहरों में घुमक्कड़ी का आनन्द ले सकते हैं। फलों का उत्पादन भी जयंतिया हिल्स की खासियत है। जयंतिया हिल्स पर नारंगी, अनानास एवं सुपारी खासिया का उत्पादन खास तौर से होता है। अनानास का उत्पादन बहुतायत में होता है।

   जयंतिया हिल्स की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट गुवाहाटी एयरपोर्ट है। गुवाहाटी एयरपोर्ट से जयंतिया हिल्स की दूरी करीब 181 किलोमीटर है। 
  हालांकि शिलांग एयरपोर्ट से भी जयंतिया हिल्स की यात्रा कर सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन गुवाहाटी जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी जयंतिया हिल्स की यात्रा कर सकते हैं।
25.443500,92.196700

Tuesday, December 31, 2019

चंदेल हिल स्टेशन: बादलों का आशियाना

   चंदेल हिल स्टेशन को पर्वतीय सौन्दर्य का इन्द्रधनुषी आयाम कहा जाना चाहिए। जी हां, चौतरफा पर्वत श्रंखलाओं से घिरा चंदेल वस्तुत: एक शानदार छोटा शहर है। 

   इस शहर में गांव की सोंधी सुगंध का एहसास किया जा सकता है। इसे बादलों का आशियाना भी कह सकते हैं। भारत के मणिपुर का चंदेल वस्तुत: उत्तर-पूर्व दिशा में पहाड़ियों के मध्य रचा-बसा एक सुन्दर शहर है। भारत के पड़ोेसी देश म्यांमार से लगा होने के कारण इसे सीमावर्ती पर्यटन भी कह सकते हैं।

  चंदेल का अद्भुत एवं विलक्षण सौन्दर्य पर्यटकों को सम्मोहित कर लेता है। चंदेल पर बादलों की घुमक्कड़ी पर्यटकों को बेहद रोमांचित करती है। बादलों का मखमली स्पर्श पर्यटक कभी भूल नहीं पाते हैं।

   शायद इसीलिए चंदेल हिल स्टेशन पर्यटकों का बेहद पसंदीदा पर्यटन क्षेत्र है। मखमली घास के विशाल मैदान एवं ढ़लान चंदेल की खासियत है। चौतरफा आैषधीय वनस्पतियों के सघन वन क्षेत्र अपनी विशिष्टता से चंदेल को काफी कुछ खास बना देते हैं। आैषधीय वनस्पतियों की सुगंध से चंदेल सदैव महकता रहता है। 

   चौतरफा प्रकृति का अनुपम उपहार चंदेल की खूबसूरती में चार चांद लगा देता है। वस्तुत: मणिपुर का यह क्षेत्र जनजातीय आबादी से आच्छादित है। लिहाजा पर्यटक जनजातीय संस्कृति एवं लोक रंंजकता का भी भरपूर आनन्द ले सकते हैं। खास यह है कि चंदेल का जनजातीय आतिथ्य देश में बेहद प्रसिद्ध है।

   चंदेल की यात्रा करनी है तोे फरवरी से दिसम्बर की अवधि में यात्रा करनी चाहिए। सर्दियों में यात्रा का आनन्द लेना हो तो दिसम्बर से फरवरी की अवधि में यात्रा करनी चाहिए। 

   जिससे प्रकृति के हर सुन्दर आयाम का आनन्द उठा सकें। कारण यह कि चंदेल में सर्दियों का अपना एक अलग ही आनन्द होता है। चंदेल एवं उसके आसपास आकर्षक एवं सुन्दर स्थानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। 
   इनमें खास तौर से तेंगनोपाल, मोरे एवं यैंगेंगपोक्पी लोकचाओ आदि इत्यादि हैं। यैंगेंगपोक्पी लोकचाओ वस्तुत: एक शानदार वन्य जीव अभयारण्य है।

   तेंगनोपाल: तेंगनोपाल वस्तुत: प्राकृतिक सौन्दर्य का एक सुन्दर आयाम है। समुद्र तल से करीब करीब 2500 फुट से 10000 फुट की ऊंचाई पर स्थित तेंगनोपाल बेहद आकर्षक है। वस्तुत: यह क्षेत्र प्राचीन राजवंशीय क्षेत्र है।

  मान्यता है कि पखंगा शासक का तेंगनोपाल में प्रवास हुआ करता था। बराक एवं मणिपुर की सुन्दर झिलमिलाती नदी के मध्य रचा बसा तेंगनोपाल अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए बेहद प्रसिद्ध है। 
   चंदेल से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित पहाड़ी पर तेंगनोपाल पर आैषधीय वनस्पतियों का खजाना है। यहां से मणिपुर का प्राकृतिक सौन्दर्य अति दर्शनीय प्रतीत होता है। यहां से आसपास की सुन्दर झीलें बेहद लुभावनी प्रतीत होती हैं।
   मोरे: मोरे चंदेल से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित एक अति दर्शनीय क्षेत्र है। भारत म्यांमार के सीमा क्षेत्र में स्थित पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। प्रकृति प्रेमियों के लिए मोरे किसी स्वर्ग से कम नहीं है। मोरेे वस्तुत: मणिपुर का कामर्शियल हब है। लिहाजा पर्यटक मोरे में खरीदारी का शौक भी पूरा कर सकते हैं।
   यैंगेंगपोक्पी लोकचाओ वन्य जीव अभयारण्य: यैंगेंगपोक्पी लोकचाओ वन्य जीव अभयारण्य वस्तुत: चंदेल की शान एवं शोभा है। करीब 185 वर्ग किलोमीटर में फैला अभयारण्य पक्षियों का एक शानदार आशियाना है। 

   आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित यैंगेंगपोक्पी लोकचाओ वस्तुत: विलुप्त वन्य जीवों का सरक्षण क्षेत्र भी है। इस अभयारण्य में खास तौर से काले हिमालयन भालू, शेर, चीता, बाघ, जंगली भालू आदि इत्यादि हैं।

    चंदेल हिल स्टेशन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट इम्फाल एयरपोर्ट है। इम्फाल एयरपोर्ट से चंदेल हिल स्टेशन की दूरी करीब 49 किलोमीटर है।
   निकटतम रेलवे स्टेशन दीमापुर रेलवे जंक्शन है। दीमापुर रेलवे स्टेशन से चंदेल हिल स्टेशन की दूरी करीब 178 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी चंदेल हिल स्टेशन की यात्रा कर सकते हैं।
24.327380,93.992580

Sunday, December 29, 2019

नेेतरहाट: सौन्दर्य का अद्भुत संगम

   नेतरहाट को प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भुत एवं विलक्षण संगम कहा जाना चाहिए। जी हां, नेतरहाट का प्राकृतिक सौन्दर्य अति दर्शनीय है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया हो। 

    भारत के झारखण्ड के लातेहार का यह शानदार एवं सुन्दर पर्यटन स्थल पर्यटकों का बेहद पसंदीदा क्षेत्र है। नेतरहाट वस्तुत: आदिवासी बाहुल्य इलाका है। लिहाजा पर्यटक यात्रा के दौरान आदिवासी संस्कृति का भी आनन्द ले सकते हैं।

   आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित सघन वन क्षेत्र नेतरहाट की विशिष्टता है। लिहाजा नेतरहाट का इलाका आैषधीय वनस्पतियों की सुगंध से महकता रहता है। नेतरहाट का स्थानीयता में शाब्दिक अर्थ 'बांस का बाजार" होता है। 

   वस्तुत: देखेें तो प्रकृति ने नेतरहाट को बहुत ही खूबसूरती से सजाया है। समुद्र तल से करीब 3622 फुट की ऊंचाई पर स्थित नेतरहाट झारखण्ड का एक अति दर्शनीय पर्यटन क्षेत्र है।
  झारखण्ड की राजधानी रांची से करीब 150 किलोमीटर दूर स्थित नेतरहाट अपने अद्भुत एवं विलक्षण सौन्दर्य के लिए वैश्विक ख्याति रखता है। 

   खास यह है कि नेतरहाट पर प्रकृति के शानदार दर्शन होते हैं। सूर्योदय एवं सूर्यास्त का लालिल्य एवं इन्द्रधनुषी छटा देखते ही बनती है। इसे छोटा नागपुर की रानी भी कहा जाता है। नेतरहाट की विशिष्टता झील एवं झरने हैं। 

   लिहाजा इनका अवलोकन किये बिना नेतरहाट की यात्रा अधूरी होगी। नेतरहाट एवं आसपास प्राकृतिक सौन्दर्य से लबरेज एवं सुन्दर स्थानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान हैं। इनमें खास तौर से सनराइज प्वाइंट, मंगोलिया प्वाइंट, ऊपरी घाघरी झरना, निचली घाघरी झरना, लोध झरना एवं चीड़ वन आदि इत्यादि हैं। 
   सनराइज प्वाइंट: सनराइज प्वाइंट नेतरहाट का विशिष्ट स्थान है। खास यह है कि उगते सूरज का दर्शन बेहद रोमांचक एवं दर्शनीय होता है। विशेषज्ञों की मानें तो सूर्योदय एवं सूर्यास्त का अद्भुत दर्शन नेतरहाट के अलावा अन्य कहीं भी मुश्किल है। सघन वन क्षेत्र में स्थित सनसेट प्वाइंट पर सुबह एवं सांझ पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है।
   मंगोलिया प्वाइंट: मंगोलिया प्वाइंट ढ़लते सूरज की दर्शनीयता का खास प्वाइंट है। मंगोलिया प्वाइंट को प्रेम दर्शन का भी स्थल माना जाता है। मंगोलिया प्वाइंट एक ब्रिटिश युवती की प्रेम कथा पर आधारित है। 

   मान्यता है कि ब्रिाटिश युवती मंगोलिया एक चरवाहे की बांसुरी की धुन से प्रभावित थी। युवती उस चरवाहे से प्रेम करने लगी थी लेकिन परिजनों को यह प्रेम स्वीकार नहीं था। 
   लिहाजा मंगोलिया नामक युवती ने इस पहाड़ी से कूद कर आत्महत्या कर ली थी। लिहाजा इस सनसेट प्वाइंट को मंगोलिया प्वाइंट कहा जाने लगा। इसे लवर्स प्वाइंट के नाम से भी जाना जाता है।
   ऊपरी घाघरा झरना: ऊपरी घाघरा झरना नेतरहाट से करीब 4 किलोमीटर दूर स्थित है। यह एक अति सुन्दर एवं दर्शनीय पिकनिक स्पॉट है। यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को सम्मोहित कर लेता है।
   निचली घाघरा झरना: निचली घाघरा झरना नेतरहाट से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है। घने जंगलों के बीच स्थित इस झरना का प्राकृतिक सौन्दर्य देखते ही बनता है। करीब 32 फुट की ऊंचाई से गिरते इस झरना को देखने के लिए पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है। 
   लोध झरना: लोध झरना नेतरहाट सेे करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित है। बुरहा नदी का हिस्सा यह शानदार झरना अति दर्शनीय है। करीब 468 फुट की ऊंचाई से गिरने वाला यह झरना झारखण्ड का सबसे ऊंचा झरना माना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो इस झरना की प्रतिध्वनि करीब 10 किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है। 
   चीड़ वन: चीड़ वन नेतरहाट का एक शानदार अभयारण्य है। आैषधीय वनस्पतियों की प्रचुरता इस अभयारण्य को काफी कुछ विशिष्ट बना देती है। यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को लुभाता है।
   नेतरहाट की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बिरसा मुंडा इण्टरनेशनल एयरपोर्ट रांची है। एयरपोर्ट से नेतरहाट की दूरी करीब 155 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन रांची जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी नेतरहाट की यात्रा कर सकते हैं।
23.744800,84.507600

ओडो बोटानिया: रोमांचक मखमली एहसास    ओडो बोटानिया को धरती का ताज कहा जाना चाहिए। जी हां, ओडो बोटानिया का प्राकृतिक सौन्दर्य विलक्षण है...